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    वासना का अभिशाप

    July 02, 2022 0

    वासना का अभिशाप  रूपगर्विता अप्सरा वपु अपनी पूर्ण साज-सज्जा के साथ चल दी महर्षि दुर्वासा को उनके तप से विचलित करने के लिए। वप ने सोचा सर्वत्...

    चावलों में कंकड़

    June 25, 2022 0

    चावलों में कंकड़  संत पुरंदर गृहस्थ थे तो भी क्या लोभ, क्या काम और क्रोध उन्हें छू भी नहीं गए थे। दो-तीन घरों में भिक्षाटन करते, उससे जो दो ...

    समय के पंख

    June 18, 2022 0

    समय के पंख  एक बार एक कलाकार ने अपने चित्रों की प्रदर्शनी लगाई। उसे देखने के लिए नगर के सैकड़ों धनी-मानी व्यक्ति भी पहुंचे। एक लड़की भी उस प...

    मंदबुद्धि वरदराज

    June 11, 2022 0

    मंदबुद्धि वरदराज  संस्कृत-व्याकरण के सारभूत ग्रंथ लघुसिद्धांत कौमुदी को कौन नहीं जानता। लघुसिद्धांत कौमुदी संस्कृत व्याकरण का वह ग्रंथ है जि...

    सच्चा प्रजासेवक

    May 28, 2022 0

    सच्चा प्रजासेवक  हजरत अबूबकर का विश्वास था कि निर्धन से निर्धन नागरिक को जीवनयापन के लिए जितनी सुविधाएँ उपलब्ध हैं उससे अधिक सुविधाएँ लेने क...

    फूट विनाश का कारण

    May 21, 2022 0

    फूट विनाश का कारण  कुछ लकड़हारे लकड़ी काटने के मंतव्य से एक जंगल में घूमघूम कर वृक्षों का निरीक्षण करने लगे। उनको ऐसा करते देखकर जंगल के वृक...

    अमरत्व से श्रेष्ठ सदाचार

    May 14, 2022 0

    अमरत्व से श्रेष्ठ सदाचार  बलाधि ऋषि के नवजात शिशु की मृत्यु हो गई। उससे वे बहुत व्याकुल हो उठे। उन्होंने देवराज की उपासना कर एक अमर पुत्र प्...

    अतिथि देवो भव

    May 07, 2022 0

    अतिथि देवो भव  शकंभर राज्य का मौरका गाँव, दस्युओं और अपराधियों का गढ़ समझा जाता था। अपने प्राचीन इतिहास में इस गाँव ने हत्या, डाकेजनी, छीना-...

    अंधविश्वास की जड़

    April 30, 2022 0

    अंधविश्वास की जड़  एक थे बड़े सज्जन व्यक्ति ! नाम था सजनप्रसाद। सज्जन और सदाचारी भी थे और ईश्वर भक्त भी, किंतु धर्म का कोई विज्ञानसम्मत स्वरू...

    तैमूरलंग की कीमत

    April 23, 2022 0

    तैमूरलंग की कीमत  दुनिया के कट्टर और खूखार बादशाहों में तैमूरलंग का भी नाम आता है। व्यक्तिगत महत्त्वाकांक्षा, अहंकार और जवाहरात की तृष्णा से...

    धन्य है इस न्यायप्रियता को

    April 16, 2022 0

    धन्य है इस न्यायप्रियता को  तक्षशिला के बौद्ध राजा आंभीक से स्वागत पाकर सिकंदर सुस्ताने के लिए तक्षशिला में ठहर गया। एक दिन सायंकाल वह घूमता...

    विवेक की विजय

    April 09, 2022 0

    विवेक की विजय  प्राचीन पंचनद का एक लकड़हारा एक दिन जंगल में गया। जैसे ही वह लकड़ी काटने को हुआ उसने देखा एक जौहड़ में सुअर का बच्चा फँस गया ...

    धन यहाँ न सही कहीं और सही

    April 02, 2022 0

    धन यहाँ न सही कहीं और सही एक व्यक्ति के पास बहत धन था, पर स्वभाव से वह था  कंजूस। न स्वयं खा-पी सके और न किसी को दे ही सके। घर में अपने धन क...

    श्रम का अमृत

    March 26, 2022 0

    श्रम का अमृत  चलते-चलते शाम हो गई तो गुरु नानक पास के गाँव में एक निर्धन किसान के यहाँ ठहर गए। उस गाँव के सेठ ने यह सुना कि आज रात्रि को गरु...

    धन यहाँ न सही कहीं और सही

    March 19, 2022 0

    धन यहाँ न सही कहीं और सही  एक व्यक्ति के पास बहुत धन था, पर स्वभाव से वह था कंजूस। न स्वयं खा-पी सके और न किसी को दे ही सके। घर में अपने धन ...

    दीपक जलाओ, प्रकाश फैलाओ

    March 05, 2022 0

    दीपक जलाओ, प्रकाश फैलाओ  सायंकाल होती तो घर के सब काम-काज ठप पड़ जाते। आग का 'अकाड़ा' जलाकर सब बैठते और अंधकार को मनमाना कोसते। कोई ...

    आसक्ति ही बंधन है

    February 26, 2022 0

    आसक्ति ही बंधन  काकभुशुंडि जी के मन में एक बार यह जानने की इच्छा हुई कि क्या संसार में ऐसा भी कोई दीर्घजीवी व्यक्ति है, जो विद्वान भी हो पर ...

    जो सिर काटे आपना

    February 19, 2022 0

    जो सिर काटे आपना  ज्ञानप्राप्ति के लिए अति उत्सुक एक भक्त के आग्रह से एक दिन __ कबीर ने कहा-"वत्स, पैर के नीचे की शिला को उठा।" शि...