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    श्री चन्द्र स्तुति

    June 29, 2022 0

     श्री चन्द्र स्तुति  शशि मयंक रजनीपति स्वामी, चन्द्र कलानिधि नमो नमामि।  राकापति हिमांशु राकेशा, प्रणवत जन तन हरहु कलेशा।  सोम इन्दु विधु शा...

    श्री मंगल स्तुति

    June 28, 2022 0

      श्री मंगल स्तुति  जय जय जय मंगल सुखदाता, लोहित भौमादिक विख्याता। ___  अंगारक कुज रुज ऋणहारी, करह दया यही विनय हमारी। हे महिसुत छितिसुत सुख...

    श्री बुध स्तुति

    June 27, 2022 0

     श्री बुध स्तुति  जय शशि नन्दन बुध महाराजा, करहु सकल जन कहँ शुभ काजा।  दीजै बुद्धिबल सुमति सुजाना, कठिन कष्ट हरि करि कल्याना। हे तारासुत रोह...

    श्री बृहस्पति स्तुति

    June 26, 2022 0

      श्री बृहस्पति स्तुति  हा जयति जयति जय श्री गुरूदेवा, करों सदा तुम्हरी प्रभु सेवा।  देवाचार्य तुम देव गुरु ज्ञानी, इन्द्र पुरोहित विद्यादान...

    श्री शुक्र स्तुति

    June 25, 2022 0

      श्री शुक्र स्तुति  शुक्र देव पद तल जल जाता, दास निरन्तर ध्यान लगाता।  हे उशना भार्गव भृगु नन्दन, दैत्य पुरोहित दुष्ट निकन्दन।  भृगुकुल भूष...

    श्री शनि स्तुति

    June 24, 2022 0

     श्री शनि स्तुति  जय श्री शनिदेव रवि नन्दन, जय कृष्णो सौरी जगवन्दन।  पिंगल मन्द रौद्र यम नामा, वप्र आदि कोणस्थ ललामा।  वक्र दृष्टि पिप्पल तन...

    श्री राहु स्तुति

    June 23, 2022 0

     श्री राहु स्तुति  जय जय राहु गगन प्रविसइया, तुमही चन्द्र आदित्य ग्रसइया।  रवि शशि अरि स्वर्भानु धारा, शिखी आदि बहु नाम तुम्हारा।  सैहिकेय त...

    श्री केतु स्तुति

    June 22, 2022 0

      श्री केतु स्तुति  जय श्री केतु कठिन दुखहारी, करहु सुजन हित मंगलकारी।  ध्वजयुत रुण्ड रूप विकराला, घोर रौद्रतन अघमन काला। शिखी तारिका ग्रह ब...

    नवग्रह शांति फल

    June 21, 2022 0

    नवग्रह शांति फल  तीरथराज प्रयाग सुपासा, बसै राम के सुन्दर दासा।  ककरा ग्रामहिं पुरे-तिवारी, दुर्वासाश्रम जन दुख हारी।  नव-ग्रह शान्ति लिख्यो...

    नवग्रह मन्त्र

    June 20, 2022 0

     नवग्रह मन्त्र  १. सूर्य ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः  २. चन्द्र ॐ श्रीँ श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः  ३. मंगल ॐ क्राँ क्रीं क्रौं स: ...

    श्री सूर्य स्तुति

    June 14, 2022 0

    श्री सूर्य स्तुति  प्रथमहि रवि कहँ नावों माथा, करहु कृपा जनि जानि अनाथा।  हे आदित्य दिवाकर भानू, मैं मति मन्द महा अज्ञानू।  अब निज जन कहँ हर...