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    जामुन से कीजिये मधुमेह और लिकोरिया की घरेलु चिकित्सा

    Home remedies for diabetes and licorice with jamun


    जामुन से कीजिये मधुमेह और लिकोरिया की घरेलु चिकित्सा 

    लोग जामुन खाते हैं और गुठलियां वेकार समझकर फेंक देते हैं, हालाकि जामुन की गुठलियां बेकार वस्तु नहीं, यह कितने काम को वस्तु है, इसका अनुमान निम्नलिखित पक्तियो से लगाया जा सकता है .

    मरोड़-जामुन की गुठली छाव मे मुसाकर चूर्ण बना लें। चार ग्राम यह चूर्ण दही की लस्सी के साथ दिन में तीन बार उपयोग करने से सर्व प्रकार के मरोड दूर हो जाते हैं। शरद ऋतु मे दही को लस्नी के बजाए शवंत प्रबार में मिलाकर चाट लें।

    मोतियाविन्द-प्रांखो मे पानी जाता हो या मोतियाबिंद उतर रहा हो तो जामुन की गुठली सुश्मा करके बारीक पोम कर चार-चार ग्राम प्रातः व साय पानी के माय उपयोग करें और जामुन की गुठली उरावर वजन मधु मे पीस कर सलाई द्वारा प्रातः व साय प्रांखो मे लगाएँ । प्राय लोगो की यह धारणा कि एक बार मोतियाबिंद उतरना शुरू होने पर रुकता नहीं, यह श्रीपधि मिथ्या प्रमाणित कर देगी। जामुन की गुठलियां सुखा कर और बारीक पीस कर तथा मधु मिलाकर बडी-बड़ी गोलियाँ या बत्तियों बना रखें। अावश्यकता के समय मधु में घिस कर लगाए । एक वार बनाकर वर्ष-भर तक काम में ला सकते हैं।

    स्वप्नदोष-जिन्हें रात्रि के समय बुरे स्वप्न के कारण या वैसे ही चीर्यपात होता हो, वे जामुन की गुठली का चूर्ण चार-चार ग्राम प्रात व साय पानी के साथ करें।

    खूनी दस्त- जामुन की गुठली पन्द्रह ग्राम प्रात व साय पानी मे रगड कर पिलाना चाहिए ।

    आवाज बैठना- जामुन की गुठलियो की मधु मिलाकर बनाई गोलियाँ मुह मे रख कर चूसने से बैठा गला ठीक हो जाता है और आवाज का भारीपन दूर हो जाता है। यदि देर तक उपयोग किया जाए तो देर से विगडी आवाज भी ठीक हो जाती है । अधिक बोलने या गाने वालो के लिए यह एक चमत्कारी वस्तु है ।

    पतला वीर्य- जिनका वीर्य पतला हो और तनिक-मी उत्तेजना से शरीर से बाहर निकल जाता हो, वे पांच ग्राम चूर्ण जामुन की गुठली प्रतिदिन साय को गर्म दूध के साथ उपयोग करें, इससे वीर्य बढता भी है ।

    संग्रहणी-मरोड- जामुन के वृक्ष की छाल छाँव मे सुखाकर वारीक पीसें और कपडछान करें। चार-चार ग्राम प्रात , दुपहर और साय ताजा जल के साथ या गाय की छाछ के साथ सेवन करने से सग्रहणी, दस्त और मरोड मे गुणकारी है।

    जामुन की गुठली की गिरी, आम की गुठली को गिरी, काला हलेला (जग हरड) वरावर वजन लेकर चूर्ण बनाए। पानी के साथ चार ग्राम फाक लेने से दस्त वन्द हो जाते हैं ।

    मधुमेह- छांव मे सुखाई छाल वारीक पीस कर पाठ-पाठ ग्राम प्रात , दुपहर और साय ताजा जल के साथ सेवन करना मधुमेह के लिए गुण कारी है।

    जामुन की गुठली का चूर्ण पाँच रत्ती साय जल के साथ उपयोग करने से मूत्र मे शरकरा पाने के रोग मे लाभप्रद है।

    मासिक स्राव की अधिकता-जामुन की पन्द्रह ग्राम तर व ताजा छाल आधा कप पानी में रगड कर और छान कर प्रात. और साय पिलाना स्त्रियो के प्रदर रोग तथा मासिक स्राव की अधिकता के लिए गुणकारी है।

    लिकोरिया- छाँव मे सुखाई और बारीक पीस कर कपडछान की हुई जामुन की छाल पाच-पांच ग्राम प्रातः व साय पानी के साथ उपयोग करने से लिकोरिया दूर हो जाता है ।

    सूजाफ- पन्द्रह ग्राम जामुन का तर व ताजा छिलका आधा कप पानी मे घोट-छान कर प्रात व साय पिलाना सूजाक को ठीक करता है। .

    जामुन की छाल छांव मे सुखाकर बारीक पीम कर और कपडछन करके पाट-पाठ ग्राम प्रात व सायं पानी के साथ सेवन करना सूजाक के घाव को, अच्छा करता है।

    दत-रोग- जामुन की छाल छांव में सुखाकर बारीक पीसकर कपडछान करें। प्रात व साय मजन के रूप मे दांत और ममूटो पर मल कर मुह साफ पानी से साफ कर लेना चाहिए, दांतो और मसूढो के समस्त रोग दूर हो जाते हैं तथा हिलते दांत भी ठीक हो जाते है ।