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    प्रश्न -- ओशो भारत के धर्म निरपेक्ष हो जाने पर क्या विचार क्रांति में कोई मदद मिलेगी? प्रश्न--भारत के धर्मनिरपेक्ष हो जाने पर क्या विचार क्रांति में कोई मदद मिलेगी?

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    प्रश्न -- ओशो भारत के धर्म निरपेक्ष हो जाने पर क्या विचार क्रांति में कोई मदद मिलेगी? प्रश्न--भारत के धर्मनिरपेक्ष हो जाने पर क्या विचार क्रांति में कोई मदद मिलेगी? 

    ओशो--अगर ऐसा है तो धर्म निरपेक्ष राज्य बरा नहीं है। धर्म निरपेक्षता की गलती नहीं है, क्योंकि राज्य धर्म निरपेक्ष नहीं है। यानी मेरे हिसाब से राज्य को किसी को हिंदू, मुसलमान नहीं मानना चाहिए, अगर धर्म निरपेक्ष है। उसे तो व्यक्ति के हित और सुख के लिए सोचना चाहिए, अगर एक स्त्री के हित में एक पति है, और एक पति के हित में एक स्खी है, तो सवाल हिंदू, मुसलमान का नहीं है। यह बिलकुल बेमानी बात है। कानून स्त्री के लिए होना चाहिए। भारत ठीक धर्म निरपेक्ष नहीं है। वह धर्मों को स्वीकार करके चलता है, तो मुल्क धर्म निरपेक्ष नहीं है। धर्म निरपेक्ष की आड़ में ढेर बेईमानी है। धर्म निरपेक्ष कैसे है? वह कहे यह मुसलमान भी अलग नहीं है, यह हिंदू भी अलग नहीं है। रिकग्नीशन भी देने की जरूरत नहीं है। आदमी का रिकग्नीशन होना चाहिए कि यह हमारा नागरिक है, वह भी हमारा नागरिक है। हमें दोनों के हित में सोचना चाहिए। नहीं, अभी हमारा मुल्क धर्म निरपेक्ष नहीं हैं। धर्म निरपेक्ष की आड़ में ढेर बेईमानी है।

    मेरा कहना आपके लिए विश्वास ही होगा। हां, मैं तो कहता हूं कि हां लेकिन आपके लिए विश्वास ही होगा। इसलिए मेरी बात मानने की कोई जरूरत नहीं है। 

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