पानी का पम्प सही दिशा में नहीं लगाने से ला सकता है भयंकर दुष्परिणाम
पानी का पम्प
पूरे जमीन के ईशान्य में पम्प अथवा कुँआ का होना श्रेष्ठ है। पूर्व अथवा उत्तरी हिस्से भी सम्प अथवा कुँओं के लिए योग्य हैं। इन कुँओं को पूरे ईशान्य में भी नहीं होना है। ये प्रहरी तथा प्रधान गृह को भी नहीं छूना है।
किसी भी हालत में कुँए दक्षिण, पश्चिम, वायुव्य, आग्नेय तथा नैरुति में नहीं बनाना है। ऐसा बनाने से ये भयंकर दुष्परिणाम ला सकते हैं।
पश्चिम में बनायें तो स्त्री दौष्ठय, आर्थिक संकट होंगे।
दक्षिण - आग्नेय में हो तो स्त्री नाश होगा।
दक्षिण नैरुति में हो तो घर के बडों को आपदायें आ घिरेंगीं।
पूर्व आग्नेय में हो तो अग्नि तथा चोर भय होगा।
पश्चिम नैरुति में हो तो परुषों का दीर्घ रोग पीडित होना, दर्मर होना संभव है।
दक्षिण में होतो महिलाओं का दुर्मरण होगा।
पश्चिम में हो तो पैसों की तंगदस्ती होगी और पुरुषों की तन्दुरुस्ती भी बिगडेगी।
पश्चिमी वायुव्य में होतो धन हानी, चोरी न्यायिक तकाजों में घिरे होना संभव है ।
उत्तर वायुव्य में हो तो स्त्री सुख एवं प्रशान्तता का लोप, स्त्री घर छोडकर भाग चले जायेगी।
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