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    वास्तुशास्त्र - अतिथि गृह का निर्माण करवाते समय रखें इन 7 बातों का विशेष ख़याल

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    अतिथि गृह का निर्माण करवाते समय रखें इन 7 बातों का विशेष ख़याल 

    लॉड्ज "लॉड्ज" को विश्रान्तिधाम और अतिथि गृह भी कहते हैं। लॉड्ज के निर्माण में भी वास्तु नियमों का पालन करना अच्छा है। यदि यात्रि को लॉड्ज में सुविधा तथा प्रशान्तता न मिले तो वह दुबारा उस लॉड्ज में नहीं ठहरता। फलस्वरूप लॉड्ज के मालिक को नुकसान पहुँचेगा। यदि सही क्रम जारी रहेगा तो लॉइज के मालिक को निर्वाहण व्यय भी नहीं मिलेगा। इसके बजाय वास्तु शुद्धिवाले लॉइज में अनेक यात्री ठहरेंगे। लॉड्ज का नाम मशहूर होगा और उस लॉड्ज से पर्याप्त लाभ मिलेगा। लॉडज के निर्माण में ध्यान देने वाले कुछ अंश :


    1. लॉइज के नैरुति में स्टोर रूम बनाना है। उसके बगल में मालिक का कमरा होना है। चाहे तो उस कमरे को भी किराये पर दे सकते हैं। 

    2. हर एक कमरे का दरवाजा ईशान्य में अथवा उच्च में होना होगा। पूर्वी कमरों के दरवाजे पूर्व ईशान्य में, दक्षिण कमरों के दरवाजें दक्षिण आग्नेय में पश्चिम कमरों के दरवाजे पश्चिम वायुव्य में तथा उत्तरी कमरों के दरवाजें उत्तर ईशान्य में ही होना चाहिए। 

    3. "अटेच बात रूम 'कमरों के दरवाजें आग्नेय अथवा वायव्य में होना चाहिए। जिससे कि कमरों में ईशान्य की वृद्धि होकर लॉड्ज प्रगतिपथ में चलेगी। यथा संभव कमरों में स्नानागार को नैरुति में नहीं बनाना चाहिए। 

    4. लॉड्ज का मुख्य द्वार उच्च में ही होना चाहिए। 

    5. लॉड्ज के ईशान्य में खाई अथवा कुँआ होना है।

    6. दक्षिण, नैरुति एवं पश्चिम में बडे बडे पेड हों तो अच्छा होगा। 

    7. उत्तर में ज्यादा खाली जगह होतो व्यापार अच्छा चलेगा।


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