प्रश्न--ओशो, यानी ईश्वर की आस्था को आप चुनौती दे रहे हैं?
प्रश्न--यानी ईश्वर की आस्था को आप चुनौती दे रहे हैं?
ओशो--आस्था पर चुनौती है, ईश्वर पर चुनौती नहीं है। आस्था पर सबकी चुनौती है। मैं नहीं कहता आपसे कि आप आस्था करें कि पिछले जन्म हैं।
प्रश्न--आप पुनर्जन्म में विश्वास करते हैं?
ओशो--विश्वास बिलकुल नहीं करता हूं, मैं अपने अनुभव की बात कर रहा है। मेरी बात आप नहीं समझे, विश्वास से मेरी बिलकुल दुश्मनी है। जब तक मुझे अनुभव नहीं हुआ, मैंने विश्वास नहीं किया। जब तक मुझे नहीं हुआ, तब तक मैं जानने को राजी नहीं हुआ। जिस दिन मुझे अनुभव हुआ उस दिन से मैं मानता हूं।
प्रश्न--आपको सब्जेक्टिव रियलाइजेशन हुआ कि पिछले जन्म का पता चला, तो पुनर्जन्म पर विश्वास हुआ?
ओशो--विश्वास नहीं, अभी मेरा जानना है। वह विश्वास मैं नहीं करना चाहता। मेरा मतलब समझेगा। बिलीव्ह का सवाल ही नहीं है, आई नो। आई हैव कम टु नो इट सो, नाऊ इट इज नाट बिलीव्ह विथ मी, इट इज ए डर्टेन नालेज। अगर आप विश्वास करते हैं और नहीं जानते हैं--नहीं जानते हैं, तो विश्वास होता है। अज्ञान में ही विश्वास है। ज्ञान के साथ विश्वास का कोई संबंध नहीं है। जिस दिन मुझे पता नहीं था, मैं विश्वास कर सकता था। वह विश्वास होता, पर वह मैंने नहीं किया

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