• Latest Posts

    अनार से बनायें भूख बढाने वाला शर्वत

    Make an appetizing sharvat from pomegranate

     अनार से बनायें भूख बढाने वाला शर्वत

    नेत्र-खुजली- अनार के दानो के रस को तावे की कटोरी में डालकर आँच पर पकाएँ, गाढा होने पर जस्त के डिब्बे मे रख लें। प्रतिदिन एक-एक सलाई अांखो मे लगाने मे आँखो की खुजली, पलकों के बाल गिरना, पाखो का लाल रहना इत्यादि कष्ट दूर हो जाते हैं ।

    आँख की सुखी व दर्द- खट्टा अनारदाना (एक) पानी मे भिगोकर मलें । इस प्रकार लगभग साठ ग्राम पानी तैयार करके इममे एक ग्राम अफीम और तीन ग्राम फिटकरी घोलकर पाच पर पकाए । जब सारा पानी डालकर घोल गोलियां बनने योग्य गाढा हो जाए तो लम्बी-लम्बी सलाइयां-मी बनाकर रख लें।

    मेवन-विधि : आवश्यकता पड़ने पर रात्रि ममय एक सलाई अर्क गुलाव या मादे जन मे धिमकर प्रांखो के आसपास  लेप करें।

    गुणधर्म : दर्द, टीस तया मुर्ती के लिए एक चमत्कारी श्रीपधि है । प्रायः पहले दिन ही भरसक पाराम होता है ।

    पेट-दर्द- अनार के दाने निकाल लीजिए-नमक और काली मिर्च पिसी हुर्ष टिटक कर रन चूसें, पेट-ददं तुरन्त दूर हो जाएगा। जिन्हे भूख न लगती हो वे इसी तरह प्रात मेवन करें।

    जिगर व मेदा विकार-अनार का रस एक किलो किसी स्वच्छ वर्तन मे कुछ पटेग्य दीजिए ताकि निथर जाए। अब इस निथरे रस को दूसरे वर्तन में डालकर चोयाई किलो मिश्री घोलें और तत्पश्चात् नौफ का वारीक चूर्ण पन्द्रह ग्राम मिला दें। अब इसे बोतलो मे भ लीजिए, योतल का एक तिहाई भाग खाली रहै । इन बोतलो को कार्क लगाकर धूप में रखें और कभी-कभी इन्हें हिलाते भी रहें । एक सप्ताह पश्चात् उपयोग करना शुरू करें।

    उपयोग-विधि . पचाम ने सत्तर ग्राम तक दिन में दो बार। इससे भूख बरती है, दिल को ताकत मिलती है, वीर्य बढ़ता है और चेहरे का रंग लाल होने लगता है।

    पीलिया- अनार के दानो का रस एक छटाक रात्रि-समय लोहे के एक स्वच्छ वर्तन मे रग दें, प्रात' थोडी मिथी मिलाकर पियें कुछ ही दिनो मे पीलिया दूर होकर खून पैदा होने लगेगा।

    हृदय-बलवद्धं शरबत--प्रनार के दानो को निचोटार एक किलो  रस निकालें और इसमे तीन किलो चीनी मिलाकर साधारण गति मे चागनी बना लें। प्रात व साय साठ-माठ ग्राम यह शबंत ताजा जन में मिलाकर उपयोग करें, इससे प्यास बुझती है, के दूर होती है, दिल को बल मिनना है तथा दिल की धडकन के लिए गुणकारी है।

    भूख बढाने वाला शर्वत- मीठे अनार का रस सवा नौ ग्राम, खट्टे अनार का रस सवा-सौ ग्राम, सेव का रस चीथाई किलो, नीबू का रस नीयाई किलो, हरे पोदीने का रम चौधाई किलो तथा मिश्री दो किलो-शर्यत वनालें।

    सेवन-विधि पचास-पचास ग्राम प्रात व शाय ।

    यह शर्वत जिगर तथा मेदे के विकार दूर करके सब भूय लगाता है। हैजे के दिनो में इसका उपयोग अत्यत लाभदायक मिद्ध होता है ।